
बलरामपुर उत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही और अवैध क्लिनिकों क्लिनिकों की मनमानी ने ए बार फिर शर्मनाक तस्वीर पेश करती कर दी है। हालत यह है कि, संवों में झोलाछाप खुद कोप्रॉक्टर घोषित कर लोगों की जिंदगी से खोल खोल रहे हैं और प्रशासन आंखें मूंदे बेहा है। मुरकौल गांव में बुखार से से पीडित पी महिला को ऐसे ही खुदभूत डॉक्टर ने गलत इलाज और ओवरडोज देकर मौत के मुंह में धकेल दिया। मिली जानकारी अनुस्वर, आफनगर ब्लॉक के मुरकौल गांव की मालती मरावी कई दिनों से बुखार से पीड़ित थी। 25 अक्टूबर को उसका पति उसे गांव में संचालित अवैध श्री साई बाबा मेडिकल स्टोर ले गय, हां संचालक मुकेश साहू ने खुद को डॉक्टर बताकर उसका इलाज शुरू कर दिय। दो दिन तक दवाओं से राहत मिलने के बाद महिला को तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। इसके बावजूद मेडिकल स्टोर संचालक न के तो उसे विशेषज्ञ के पास भेजने की सलाह दीमृतिका के परिजन।कारण खोजा, और न ही सही जांच कराने की। परिजनों के अनुसार, मुकेश साहू ने किट से मालती वा मलेरिया और टाइफाइड टेस्ट किया, जिनसे परिणाम निगेटिव आए। इसके बावजूद उसने न तो बुखार का वास्तविक कारण खो नही खतरे को देखते हुए रेफर किया। या समातर बुखार और दर्द के इंजेान हित दवाइयों का ओवरडोज देता रहा, जिससे उसकी लत और गंभीर होती चली गई। 3 नवंबर को मालती को अभिकापुर के मिशन हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां जांच में सामने आया कि वा डेंगू से पीड़ित है। पुर के विकित्सकों के अनुसार, देरी से अस्पताल रहने के साथ-साथ अवैधनिक में गए भारी दवा-ओवरडोज ने उसके लंग्स और लिवर को बुरी तरह नुकसान पहुंबाक था। ऐसआईसीयू में दो दिनों तक चले संघर्ष के बाद महिला की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने गांव में उसका अंतिम संस्कार किय। दो बच्चों की मां ती मालती की मौत से परिवार सदमे में है और उन्होंने मेडिकल स्टोर संचालक पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगया है। चड्कनगर बीएमओ डॉ. हेमंत दीक्षित ने आज सोमवार को बताया कि फिलहाल मामले में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन प्रकरण की जांच कराई का उवरोप लगाया है।झोलाछाप डॉक्टर कर ठिकाना। जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि आखिर कम त प्रामीण क्षेत्रों में अवैधक्लिनिक और झोलाछाप डॉक्टर इलाज की आड़ में लोगों की जान से खिलवाड़ करते रहेंगे।
