6 दिसंबर 2025 दिन शनिवार को रामानुजगंज शासकीय लरंग साय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रांगण में गौरवशाली जनजाति अतीत का उत्सव मनाया गया। इस उत्सव में जनजाति के द्वारा संस्कृति रहन-सहन खानपान वैभव वेशभूषा आदि का महत्वपूर्ण झलक दिखलाया गया। एवं विभिन्न प्रकार के उपभोग की जाने वाले व्यंजन को भी बताया गया। साथ ही औषधीय जो जनजाति आयुर्वेद के माध्यम से औषधि का जो उपयोग करते थे, उनको भी दिखाया गया ,जिससे हमारे भारत देश की जनजाति का रहन-सहन खान पान वैभव सभी को दृष्टिगत रखा गया, साथ ही झांकी के माध्यम से भगवान बिरसा मुंडा ,शहीद वीर नारायण सिंह ,रानी दुर्गावती ,जैसे आदि महान आदिवासी नेता के विषय में जानकारियां दी गई। जिससे नगर का माहौल एवं छात्र-छात्राओं की जिज्ञासा अभिभावक सभी प्रफुल्लित रहे।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रहीं ज़िला पंचायत अध्यक्ष हीरामुनि निकुंज, वही नगर पालिका अध्यक्ष रमन अग्रवाल, महाविद्यालय जनभागीदारी अध्यक्ष विकास गुप्ता, अरुण केशरी तथा समस्त गणमान्य अतिथि, महाविद्यालय की प्राचार्या रोज लिली बड़ा, सभी प्रोफेसरगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

रामानुजगंज के शासकीय लरंग साय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में “जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीतः ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक योगदान” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन हुआ। कार्यशाला में जनजातीय समाज के समृद्ध इतिहास पर सार्थक चर्चा की गई।मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष हीरामुनी निकुंज ने कहा कि जनजातीय पूर्वजों की संस्कृति और परंपराएं समाज की सबसे बड़ी धरोहर हैं। उन्होंने पारंपरिक व्यंजनों, जीवनशैली और रीति-रिवाजों के महत्व पर प्रकाश डाला, और बताया कि इनका स्मरण स्वास्थ्य, दीर्घायु और सामाजिक समरसता के लिए आवश्यक है।विशिष्ट अतिथि नगरपालिका अध्यक्ष रमन अग्रवाल ने जनजातीय समाज से सीखने योग्य मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति-संबद्ध जीवनशैली आज पूरे विश्व के लिए प्रेरणा है। अग्रवाल ने महाविद्यालय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए जनजातीय समुदाय के अमूल्य योगदान को भी याद किया। जिला पंचायत सदस्य मुंशी राम ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा में जनजातीय समाज की निरंतर भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य में जनजातीय समाज की महत्वपूर्ण सहभागिता बताई। जनभागीदारी समिति अध्यक्ष विकास कुमार गुप्ता ने महाविद्यालय के उन्नयन में जनजातीय पूर्वजों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग की सराहना की। संसद प्रतिनिधि राकेश गुप्ता ने विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शिक्षा और प्रगति के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला की मुख्य गतिविधियों में लगभग 40 पारंपरिक जनजातीय व्यंजनों की प्रदर्शनी, जनजातीय परिधान, व्यक्तित्व प्रदर्शन और रैंप वॉक शामिल थे। छत्तीसगढ़ी, नागपुरी, सैला, कर्मा और गेड़ी नृत्यों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। कई समितियों ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संवाददाता आनंद ठाकुर की रिपोर्ट…
