नक्सलवाद भारत में हमेशा से ही बड़ा और एक प्रमुख सुरक्षा मुद्दा रहा है। जिस पर वर्तमान सरकार ने कई तरह की रणनीतियां अपनाई हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार कहा है कि सरकार मार्च 2026 तक भारत से नक्सलवाद को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि इसे हासिल करना आसान नहीं होगा मगर इसी कड़ी में 18 नवंबर को सरकार ने माओवादियों को गहरी चोट पहुंचाई है। छत्तीसगढ़ के हर बड़े माओवादी हमले के पीछे जिसका दिमाग था उसको खत्म करने में हमारे सुरक्षाबलों ने सफलता प्राप्त की। जिसके बाद दावा किया जा रहा है कि माड़वी हिड़मा की मौत के बाद अब देश में नक्सलवाद की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।
आंध्रप्रदेश बॉर्डर पर एनकाउंटर में मारे गए मोस्ट वांटेड एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली हिड़मा और उसकी पत्नी का शव उसके गांव पूवर्ती में पहुंच गया है. सुरक्षागत कारणों से फिलहाल दोनों के शव को सीआरपीएफ के कैंप में रखा गया है. बताया जा रहा है कि आज गुरुवार को भारी सुरक्षा के बीच दोनों का अंतिम संस्कार होगा. थोड़ी देर में दोनों के शव को उनके घर ले जाया जाएगा. फिर ग्रामीण रीति-रिवाज से उसका अंतिम संस्कार होगा. दो दिन पहले मारा गया थादरअसल मंगलवार को आंध्रप्रदेश के बॉर्डर पर एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली माड़वी हिड़मा को ग्रेहाउंड और सुरक्षाबलों ने मार गिराया था. उसके साथ उसकी पत्नी और बाकी साथी भी मारे गए थे. अब तक आंध्र प्रदेश पुलिस की कस्टडी में हिड़मा और उसकी पत्नी का शव था. वहां सारी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद हिड़मा को उसके गांव पूवर्ती लाया गया है. बताया जा रहा है कि बुधवार की देर रात को हिड़मा के शव को पूवर्ती में लाया गया था. मां का रो-रोकर बुरा हालइधर हिड़मा से लगातार सरेंडर करने की अपील कर रही उसकी मां को जब हिड़मा के एनकाउंटर की खबर पता चली तो उसका रो-रो कर बुरा हो गया. वह सिर्फ एक बात ही कहती रही उससे कई बार मैंने सरेंडर के लिए कहा लेकिन वो माना नहीं. बताया जा रहा है कि हिड़मा अपनी मां को अपने साथ लेकर गया था. लेकिन बाद में वाप, लाकर छोड़ दिया. गांव में सालभर पहले कैंप खुला तो उसने दूरी बना ली. परिजनों से गांव के बाहर बुलाकर मिल लेता था. 6 साल पहले आया था इधर पूवर्ती गांव के लोगों ने बताया कि 6 साल पहले हिड़मा गांव आया था. तब उसने यहां सभी से मुलाकात की थी. कहा था कि फोर्स का दबाव बढ़ा रहा है. मैं अब ज्यादा नहीं आ पाउंगा. सभी अच्छे से रहना, खेती-बाड़ी करना. उसके बाद उसने गांव आना बंद कर दिया था.
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