
राजपुर क्षेत्र में एक होम्योपैथिक डॉक्टर के द्वारा लगातार कई वर्षों से एलोपैथिक पद्धति से इलाज किए जाने की खबर प्राप्त हो रही है, गौरतलब है कि शासन का स्पष्ट दिशा निर्देश है कि कोई पंजीकृत डॉक्टर जिस पद्धति से पंजीकृत है, सिर्फ उसी पद्धति से मरीज का इलाज कर सकते हैं, एवं दूसरे पद्धति से इलाज करना गैर कानूनी होने के साथ-साथ मरीजों के जीवन से खिलवाड़ करना है, इसके बावजूद भी राजपुर में एक होम्योपैथिक डॉक्टर के द्वारा धड़ले से ग्रामीण क्षेत्र के भोले भाले नागरिक का उपचार एलोपैथिक पद्धति से करके उनके जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा, जिससे शासन प्रशासन का ध्यान ही नहीं है या फिर उनकी कृपा बनी हुई है, बलरामपुर के एक मेडिकल स्टोर में हुई घटना के बाद जागी प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ मेडिकल स्टोर तक सीमित दिख रही है, जिससे क्षेत्र के झोलाछाप डॉक्टरों का हौसला बुलंद है, विश्वसनीय सूत्रों की माने तो इन झोलाछाप डॉक्टरों के पास अवैध रूप से दवाई का जखीरा रहता है, शासन मेडिकल स्टोर पर तो कार्रवाई कर रही है, परंतु घूम-घूम कर इलाज करने वाले इन डॉक्टरों के पास इतना भारी मात्रा में दवाई किस माध्यम से पहुंच रही है, इसका संज्ञान अभी तक नहीं लिया गया है, यह अवैध रूप से घर-घर जाकर मरीजों को इंजेक्शन बोतल लगते हैं, और बिना जांच के हाई डोज एंटीबायोटिक के साथ-साथ बीपी शुगर की दवा दी जा रही है, इस टाइप के अवैध डॉक्टर का लंबी सूची राजपुर ब्लॉक में होना बताया जा रहा है, जिसमें त्वरित जांच कर कार्यवाही की आवश्यकता है, कुछ दिन पूर्व ही कार्रवाई किए गए एक डॉक्टर के द्वारा पुनः उपचार ग्राम कुन्दी ठरकी मुनवा आदि में कर दिया गया, वही बैढी लाऊ क्षेत्र में मितानिन के पति के द्वारा एवं गोपालपुर में भी एक बंगाली डॉक्टर के द्वारा घूम घूम कर इलाज किया जा रहा है, गोपालपूर (पाहाडपारा) में भी और ओकरा पतरापारा के द्वारा तो बरियों ककना में अवैध क्लिनिक का संचालन किया जाना बताया जा रहा है, कर्जी, चारगढ़, नरसिंहपुर, धंधापुर, भदार कमारी, पस्ता, आरा, लोधी तथा परसागुड्डी में भी घूम घूम कर इलाज कुछ बंगाली डॉक्टर के द्वारा तो कुछ स्थानीय स्तर के लोग ही सक्रिय है, जिसकी भी जांच अनिवार्य है, सबसे हैरानी की बात तो यह है कि अवैध रूप से इलाज करने वाले लोगों को इतना भारी मात्रा में दवाइयां कहां से उपलब्ध हो रही है, प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ होलसेल के द्वारा घर-घर जाकर उन्हें दिया जा रहा है, एवं ब्लॉक मुख्यालय में स्थित कुछ मेडिकल स्टोर तो इन्हे ही दवा देने का काम कर रहे हैं, जो एक गंभीर जांच का विषय है, बिना मेडिकल लाइसेंस के इतना मात्रा में दवाइयां रखना उनका हौसला बढ़ा रहा है, जिससे उन्हें अवैध दवा भंडारण करने व बिना ज्ञान के उपयोग में लाने के लिए हौसला बुलंद है, सूत्रों ने बताया की कुछ शासकीय डॉक्टर भी अवैध क्लीनिक संचालित कर रहे हैं, जिसका खुलासा जांच में आसानी से किया जा सकता है, शासन को चाहिए कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय टीम गठित कर दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करें,
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