
रामानुजगंज में सूर्य उपासना के महापर्व छठ के तीसरे दिन कन्हर नदी के तटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए हजारों की संख्या में लोग एकत्र हुए, जिससे पूरे नगर में भक्ति और लोक परंपरा का वातावरण छा गया।दोपहर 2:30 बजे से ही घाटों पर भीड़ बढ़ने लगी थी। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाएँ व्रत रखकर पूजा-अर्चना कर रही थीं, जबकि पुरुष श्रद्धालु भी छठ मइया की आराधना में शामिल हुए। छठ गीतों की गूंज, दीपों की रोशनी और नदी पर पड़ती सूर्य की किरणें एक मनमोहक दृश्य प्रस्तुत कर रही थीं।नगर के घाटों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। नवयुवक दुर्गा पूजा संघ द्वारा बनाई गई सात घोड़ों पर सवार सूर्य भगवान की भव्य मूर्ति और दबगर समाज द्वारा शिव मंदिर घाट पर स्थापित सूर्य भगवान की मूर्ति श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।नवयुवक दुर्गा पूजा संघ के सदस्य आलोक गुप्ता (गोलू) और अमित जायसवाल ने बताया कि छठ पूजन की तैयारियां 15 दिन पहले से शुरू कर दी गई थीं।

राम मंदिर कन्हर घाट और शिव मंदिर घाट सहित नगर के सात प्रमुख घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया।इस अवसर पर कृषि मंत्री राम विचार नेताम भी छठ घाट पहुंचे। उन्होंने मत्था टेककर गंगा आरती में भाग लिया और क्षेत्रवासियों को छठ पर्व की शुभकामनाएं दीं। उनके साथ नगर पालिका अध्यक्ष रमन अग्रवाल भी उपस्थित थे।मंत्री नेताम ने श्रद्धालुओं को छठ पूजन सामग्री वितरित की। नैतिक विकास संघ, रक्तदाता सेवा समिति, रमन अग्रवाल और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी छठ व्रतियों को पूजन सामग्री देकर सहयोग किया। नवयुवक दुर्गा पूजा संघ द्वारा गंगा आरती का आयोजन किया गया। काशी से आए ब्राह्मणों की टोली ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सूर्य आराधना संपन्न कराई।इस दौरान हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरा वातावरण “जय छठ मइया” के जयघोष से गूंज उठा। महिला श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में सहभागिता ने इस आयोजन को विशेष बना दिया।

पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह की पत्नी एवं पूर्व जनपद अध्यक्ष शीला सिंह, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष मधु गुप्ता, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष बैजन्ती सिंह और पार्षद उषा गुप्ता सहित अनेक महिला जनप्रतिनिधियोंनहाय-खाय के साथ शुरू हुई पर्वबलरामपुर जिले के रामानुजगंज में सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा शनिवार (25 अक्टूबर) को नहाय-खाय के साथ श्रद्धा और उत्साहपूर्वक शुरू हो गया। व्रत के दूसरे दिन हजारों की संख्या में व्रती महिलाएं कन्हर नदी तट पर पहुंचीं, जिनमें दूसरे प्रदेशों और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जगहों से आए श्रद्धालु भी शामिल थे।यहां उन्होंने विधि-विधान से स्नान, ध्यान और थाला पूजन किया। नदी से जल भरकर व्रती महिलाएं अपने घरों को लौटीं और आगे की पूजन तैयारियों में जुट गईं। अगले दिन खीर-भोजन के साथ खरना संपन्न हुआ, जिसके बाद व्रती महिलाएं 36 घंटे के कठिन निर्जला उपवास की शुरुआत की।घाटों में आवश्यक व्यवस्थाएं की गईछठ पर्व को लेकर नगर में व्यापक तैयारियां पहले से चल रही थी नगर पालिका अध्यक्ष रमन अग्रवाल ने बताया कि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं लगभग पूरी कर ली गई हैं। छठ घाटों पर सफाई, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा और जल आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।नवयुवक दुर्गा पूजा संघ के आलोक गुप्ता और अन्य सदस्य श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सक्रिय रूप से कार्य किया। प्रशासन, पुलिस विभाग और स्थानीय स्वयंसेवी संगठन घाटों पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए पूर्ण सहयोग दिया।

पूरे नगर में भक्ति और उल्लास का माहौल व्याप्त है। पर्व के लिए गांधी चौक, पीपल चौक और गांधी मैदान में सुबह 6 बजे से ही छठ उपयोगी सामग्री की दुकानें सजी थीं।ग्राहकों की भीड़ सुबह से ही उमड़ना शुरू हो गई थी और दिन भर बाजार में चहल-पहल बनी रही। गन्ना, सूप, दौरी, पीतल के बर्तन और पंचमेवा जैसी सामग्री की कई दुकानें लगी थीं। कन्हर नदी का जल 86 TDS, पूर्णतः शुद्धः छठ पर्व पर हजारों श्रद्धालुओं ने दिया सूर्य को अर्घ्यछत्तीसगढ़-झारखंड सीमा पर स्थित रामानुजगंज में बहने वाली कन्हर नदी इस बार भी छठ महापर्व की आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।

आज हजारों श्रद्धालु इसी नदी के तट पर पहुंचकर सूर्य उपासना के लिए अर्घ्य अर्पित किया। इस वर्ष कन्हर नदी का जल 86 टीडीएस (टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स) के साथ पूर्णतः शुद्ध पाया गया है, जो इसे विशेष बनाता है।जहां एक ओर पूरे देश में नदियों और जल स्रोतों के बढ़ते टीडीएस स्तर को लेकर चिंता जताई जा रही है, वहीं कन्हर नदी इस मामले में एक मिसाल बनकर उभरी है। परीक्षण में इसके जल का टीडीएस स्तर केवल 86 पाया गया है, जिसे पूर्ण रूप से शुद्ध और पीने योग्य श्रेणी में माना जाता है।विशेषज्ञों के अनुसार, 300 से कम टीडीएस वाले जल को अत्यंत स्वच्छ और स्वास्थ्य के लिए उत्तम माना जाता है। कन्हर नदी का यह शुद्ध जल क्षेत्र के लोगों के जीवन का आधार है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस नदी के जल में एक प्राकृतिक मिठास और ठंडक है, जो कहीं और नहीं मिलती।

